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इसे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚रोकेंआमतौर पर जब हमारा शरीर थक जाता है और हमें नींद आ रही होती है तो हम अंगड़ाई लेने लगते हैं। इसे उबासी लेना à¤à¥€ कहते हैं। आपने महसूस किया होगा कि जब हमें बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ थकान महसूस होती है या किसी वजह से तनाव होता है तो हम जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ जमà¥à¤¹à¤¾à¤ˆ लेते हैं। जहां तक नवजात शिशॠकी बात है तो उनके लिठà¤à¥€ अंगड़ाई लेना बेहद सामानà¥à¤¯ सी बात है।
इसे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚रोकेंबà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿà¤«à¥€à¤¡ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का रखना होगा खास धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ -1 से 3 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ को 24 घंटे के अंदर 7 से 9 बार बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ फीड कराना चाहिà¤. -3 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ को 24 घंटे के अंदर 6 से 8 बार दूध पिलाना चाहिà¤. -6 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ को à¤à¤• दिन में 6 बार दूध पिलाना चाहिà¤. -12 महीने के बचà¥à¤šà¥‡ को आपको à¤à¤• दिन में 4 बार दूध पिलाना चाहिà¤.
इसे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚रोकेंनवजात शिशॠकी देखà¤à¤¾à¤² हर माठकी पहली कोशिश रहती है ताकि शिशॠको किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े। नयी माठके जानकारी के लिठआगे आपको विसà¥à¤¤à¤¾à¤° से बताते है। नà¥à¤¯à¥‚ बोरà¥à¤¨ बेबी को अचà¥à¤›à¥‡ से दूध पिलाà¤à¤‚ – माठका दूध शिशॠके विकास में मददगार साबित होता है। इसलिठशिशॠको कम से कम छे महीने माठकी दूध की जरà¥à¤°à¤¤ होती है।
इसे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚रोकेंवैसे तो नवजात शिशॠका à¤à¤• दिन में 1 से 3 घंटा रोना सामानà¥à¤¯ बात है और इसके लिठघबराने की जरूरत नहीं है लेकिन अगर बचà¥à¤šà¤¾ इससे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रोठतो यह उसकी सेहत और बà¥à¤°à¥‡à¤¨ के लिठखतरनाक साबित हो सकता है। लिहाजा आपको पता होना चाहिठकि बचà¥à¤šà¤¾ कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ रो रहा है और उसकी उस समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान करके उसे चà¥à¤ª कराने की कोशिश करनी चाहिà¤à¥¤
इसे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚रोकेंकà¥â€à¤¯à¤¾ हैं वो 3 वजहें नवजात शिशॠपहले तीन माह में सबसे जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ रोते हैं और इसकी वजह à¤à¥‚ख होती है. हर दो घंटे में अगर उनà¥â€à¤¹à¥‡à¤‚ कà¥à¤› न खिलाया-पिलाया जाठतो वो रोते रहते हैं.
इसे सà¥à¤¨à¥‡à¤‚रोकेंनवजात शिशà¥à¤“ं के सोने का समय जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनका शरीर तेजी से बढ़ रहा होता है और उनकी बेहतर मेंटल और फिजिकल गà¥à¤°à¥‹à¤¥ के लिठउनका सोना बहà¥à¤¤ जरूरी है, विशेष रूप से बà¥à¤°à¥‡à¤¨ और सेंटà¥à¤°à¤² नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® के विकास लिठबचà¥à¤šà¥‡ का सोना बहà¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• है।
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